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Archive for the ‘Hindi-urdu gazals’ Category

185-माँगोना-Mangona-Gazal

आँखे पढलो, किताब माँगोना,

भूल करभी जवाब माँगोना !

चाँदभी तो हसीन लगता है,

रातमें आफताब माँगोना !

देख लिया रकीबने तो क्या?

यूँ ही डरके नकाब माँगोना !

आज सिमट रहो न बाहोमें.

दूर रहके हिसाब माँगोना !

लोग सुने गझल यही काफी,

‘साज’ अब तूम खिताब माँगोना !

-‘साज’ मेवाडा

 

 

 

 

 

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180 – लोग-गझल

अफवाऐं फैलाया करते है लोग,

सचकोभी उलझाया करते है लोग .

जब खूदाभी ना सुने उनकी बात,

राझ-ए-दिल छूपाया करते है लोग.

जिनेका मकसद कोई ना जाने,

जितेजी मरजाया करते है लोग.

मयखाने जाकर क्या मय पिते है?,

आंसुं पिने जाया करते है लोग.

अबतक खूदकोभी ना समजा है ‘साज’,

जाने क्या समजाया करते है लोग.

   -‘साज’ मेवाडा

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गझल कैसे हो….

बंजर जमीमें बीज बोते हो,

क्यों शिर पकडके तूम रोते हो?

गंगा समज तालाबमें न्हा कर,

कैसे तुम्हारे पाप धोते हो?

हैरान है भगवानभी अबतो,

ये बूत मंदिरका भिगोते हो!

तारे फलकमें देखकर प्यारे,

दहलीझका दीपकभी खोते हो!

सच्चे कभी होते नहीं तोभी,

सपने सजाके साजसोते हो!

-‘साजमेवाडा

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101 – Bate kare-Gazal – Saaj Mevada-बाते करे

…बाते करे

लो खूदसेही खूदकी बाते करे,

वैसे दिदारेयारकी बाते करे.

आवाज दे कैसे बुलाये उनको?,

आते नहीं, दिवारकी बाते करे.

है ये तसल्ली उनकोभी प्यार है,

वो ख्वाबमेंभी आपकी बाते करे.

झाहिदभी देखा करे, पिते रहो,

वो भी नशेमें जन्नतकी बाते करे.

होगा नहीं आसां समजना ‘साज’को,

पीके झहर वो जीनेकी बाते करे.

-‘साज’ मेवाडा

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Chali Jati hai-Saaj Mevada-चली जाती है

 

गझल

हर साल आती है, चली जाती है,

वो मेरे सनमसी हुई जाती है.

आंखे दिखा जबसे उसे छेडी है,

आफतेबला हसके चली जाती है.

पूछो कभी ये मौसमेबहार को,

है क्या नशा, क्यों भूल हुई जाती है?

दिनमें कभी वो चांदको देखा है,

पर चांदनी रात, कही जाती है.

मालूमथा कि ‘साज’, वो आयेगा,

ये बेकरारी क्यों बढी जाती है?

-‘साज’ मेवाडा.

છંદ – ગાગાલગા ગાગાલગા ગાગાગા

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77-तू…….

तू…….

बच्चा मांगे चांदको,

मेरा मन मांगे तू,

ए कैसी जूस्त-जू है,

न चांद मिला है न तू.

 

नदीकी भीनी रेत पर,

फिसल गया है तू,

किसीने देखातो नहीं,

क्युं रो रहा है तू.

 

जमानेभरकी दुवाओं लेकर,

जब जी रहा है तू,

लंबी सफरके अंतमे खूब,

थका हुवा है तू.

 

“साज” को किसीने तोडा है,

क्या सुर निकालेगा तू,

वो कान बंध करके बैठा है,

गाना कैसे सुनायेगा तू.

“साज” मेवाडा

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Shammaa-ae mohobat

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

ए शम्मा क्या? परवाना क्या है?

गझलके घरमे दिवाना क्या है?

ये ओंखोंको मिलाना क्या है?

ये जामेगम पिलाना क्या है?

ये साकीका मयखाना क्या है?

ये जीना क्या? मरजाना क्या है?

ये जीतेजी मरजाना क्या है?

ये मरकेभी जीजाना क्या है?

ये साझका मिलाना क्या है?

ये गाना क्या? बजाना क्या है?

ये गीतोंको गुनगुनाना क्या है?

साजमेवाडा

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